Diabesity Karan Lakshan Roktham:आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोटापा और डायबिटीज दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं। जब ये दोनों समस्याएँ एक साथ होती हैं, तो इसे “डायबेसिटी (Diabesity)” कहा जाता है। यह मेटाबॉलिक सिंड्रोम का एक गंभीर रूप है जिसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस, फैटी लिवर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी दिक्कतें भी शामिल हो जाती हैं। The Economic Times और कई हेल्थ रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में डायबेसिटी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और यह आने वाले वर्षों में बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनने जा रहा है।
डायबेसिटी (Diabesity) क्या है?
डायबेसिटी का मतलब है — डायबिटीज + ओबेसिटी (मोटापा)। यह ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में मोटापा बढ़ने के साथ-साथ ब्लड शुगर लेवल भी कंट्रोल से बाहर हो जाता है। मोटापे के कारण इंसुलिन सही से काम नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर बढ़ जाता है और धीरे-धीरे डायबिटीज और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ जन्म लेती हैं।
डायबेसिटी के मुख्य कारण
- अस्वस्थ खानपान – जंक फूड, मीठे पेय, ऑयली और हाई-कैलोरी डाइट।
- शारीरिक गतिविधि की कमी – दिनभर बैठकर काम करना और व्यायाम न करना।
- तनाव और नींद की कमी – हार्मोनल असंतुलन का बड़ा कारण।
- आनुवंशिक कारण – परिवार में डायबिटीज/मोटापे का इतिहास।
- शराब और तंबाकू का सेवन – मेटाबॉलिज्म और लिवर पर नकारात्मक असर।Diabesity Karan Lakshan Roktham
डायबेसिटी से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम
डायबेसिटी सिर्फ डायबिटीज और मोटापे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
- हृदय रोग (Cardiovascular Disease) – ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से हार्ट अटैक का खतरा।
- फैटी लिवर – लिवर में वसा जमा होकर कार्यक्षमता कम कर देता है।
- किडनी रोग – लंबे समय में किडनी फेलियर का खतरा।
- स्ट्रोक और ब्लड क्लॉट – ब्लड सर्कुलेशन की समस्या।
- कैंसर का खतरा – मोटापा और हाई ब्लड शुगर कई प्रकार के कैंसर का रिस्क बढ़ाते हैं।
डायबेसिटी के लक्षण
- लगातार थकान रहना
- बार-बार प्यास लगना और पेशाब आना
- वजन तेजी से बढ़ना या कम न होना
- ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल का असंतुलन
- भूख अधिक लगना और मीठा खाने की इच्छा बढ़ना
डायबेसिटी की रोकथाम और नियंत्रण
1. संतुलित आहार
- सब्ज़ियाँ, फल, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल करें।
- मीठे पेय, जंक फूड और तैलीय खाना कम करें।
2. नियमित व्यायाम
- रोजाना 30–40 मिनट वॉक, योग या जिम करें।
- लंबे समय तक बैठे रहने से बचें।
3. तनाव प्रबंधन और नींद
- योग, ध्यान और प्राणायाम से तनाव कम करें।
- 7–8 घंटे की नींद ज़रूरी है।
4. नियमित स्वास्थ्य जांच
- ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाएं।
- शुरुआती पहचान से गंभीर बीमारी रोकी जा सकती है।
भारत में डायबेसिटी की स्थिति
हेल्थ डेटा के अनुसार, भारत में हर 5 में से 1 वयस्क डायबेसिटी या मेटाबॉलिक सिंड्रोम से प्रभावित है। शहरी इलाकों में यह समस्या अधिक है, लेकिन अब यह ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर जागरूकता और रोकथाम पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में डायबेसिटी एक बड़ी महामारी का रूप ले सकती है।
FAQ
Q1. डायबेसिटी क्या केवल मोटापे से जुड़ी है?
→ नहीं, इसमें मोटापा और डायबिटीज दोनों एक साथ जुड़े रहते हैं।
Q2. क्या डायबेसिटी को ठीक किया जा सकता है?
→ जीवनशैली में सुधार और दवाओं से इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
Q3. क्या बच्चे भी डायबेसिटी से प्रभावित हो सकते हैं?
→ जी हां, गलत खानपान और शारीरिक गतिविधि की कमी से बच्चों में भी यह समस्या देखी जा रही है।
निष्कर्ष
डायबेसिटी आज के समय की सबसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। मोटापा और डायबिटीज दोनों ही मिलकर शरीर को अंदर से कमजोर बना देते हैं और कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं। यदि समय रहते लोग स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम पर ध्यान दें तो डायबेसिटी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
Disclaimer
यह लेख केवल शैक्षिक और जागरूकता उद्देश्यों के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या उपचार के लिए हमेशा डॉक्टर से परामर्श लें।
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